PACS में क्लर्क-कम-कैशियर की भर्ती कौन करता है? CMS में मैनेजर का चयन किस समिति के ज़रिए होता है? किसी नियुक्ति में प्रक्रियागत चूक हो जाए तो क्या पूरी भर्ती रद्द हो जाती है? पदोन्नति का कोटा कितना है? और अगर किसी कर्मचारी का सेवा-विवाद हो, तो वह कहाँ जाए — रजिस्ट्रार के पास, लेबर कोर्ट या सीधे हाईकोर्ट? यह गाइड हरियाणा की PACS और CMS में सेवा-नियम, भर्ती-प्राधिकार, पदोन्नति और विवाद-निपटान से जुड़े पूरे ढांचे को एक जगह, स्रोत-सहित समेटती है।
📌 शुरुआती नोट: सेवा-नियम, पद-संख्या, आयु-सीमा, वेतन व कोटा समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं। इस गाइड में दिए ठोस आँकड़े/धाराएँ नीचे स्रोत खंड में दिए आधिकारिक दस्तावेज़ों पर आधारित हैं — पर किसी भी वास्तविक भर्ती/सेवा-मामले में हमेशा अपने ज़िले के सहायक/उप-रजिस्ट्रार कार्यालय व नवीनतम अधिसूचना से पुष्टि कर लें।
PACS/CMS कर्मचारियों की सेवा-शर्तें एक नहीं, तीन स्तर के दस्तावेज़ों से तय होती हैं — हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम 1984 (मूल क़ानूनी ढांचा), हरियाणा सहकारी समिति नियम 1989 (नियम 29 के ज़रिए यह अनिवार्य करता है कि हर समिति के पास रजिस्ट्रार-अनुमोदित मॉडल सेवा-नियम हों), और इसके ऊपर हर तरह की समिति के लिए बने विशेष Staff Service Rules — PACS/PCCS के लिए 2014 से लागू नियम (व बाद के संशोधन), और CMS के लिए 2003 के Staff Service Rules (व बाद के संशोधन)।
इस "तीन-परत" को समझना ज़रूरी है, क्योंकि किसी भी सवाल का जवाब इन्हीं में से किसी एक परत में मिलता है:
| परत | दस्तावेज़ | क्या तय करता है |
|---|---|---|
| मूल क़ानून | हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम, 1984 | अधिकार, प्राधिकारी, विवाद-निपटान का ढाँचा |
| नियम | हरियाणा सहकारी समिति नियम, 1989 | मॉडल सेवा-नियम की अनिवार्यता (नियम 29), भर्ती-भूमिकाएँ |
| सेवा-नियम | PACS/PCCS 2014 · CMS 2003 (+ संशोधन) | पद, योग्यता, आयु, भर्ती/पदोन्नति, अनुशासन |
⚠️ एक और ज़रूरी सीमा — नियम 27(i) के तहत कोई वेतनभोगी कर्मचारी प्रबंध समिति (Managing Committee) का सदस्य नहीं बन सकता (उत्पादक समितियों के लिए कुछ अपवाद हैं)। यानी कर्मचारी और शासन (governance) की भूमिकाएँ जानबूझकर अलग रखी गई हैं।
PACS/PCCS में सिर्फ़ 4 स्वीकृत पद होते हैं — प्रबंधक (Prabandhak), क्लर्क-कम-कैशियर, सेल्समैन और प्यून-कम-चौकीदार। CMS का ढांचा इससे बड़ा है — 10 स्वीकृत पद — मैनेजर, असिस्टेंट मैनेजर, अकाउंटेंट, कैशियर/असिस्टेंट अकाउंटेंट, स्टोर कीपर, सेल्समैन-कम-क्लर्क, प्यून-कम-चौकीदार, ट्रक क्लीनर, ड्राइवर व मिस्त्री।
💡 CM-PACS का "मैनेजर" पद इनसे पूरी तरह अलग है — वह बाहरी भर्ती से नहीं भरा जाता, यह पद सिर्फ़ समिति के किसी सदस्य को ही दिया जा सकता है (देखें: CM-PACS क्या है)।
हर समिति में सभी पद अपने-आप स्वीकृत नहीं होते — यह समिति के आकार (ऋण/जमा या टर्नओवर) पर निर्भर करता है:
| समिति | वर्गीकरण का आधार | स्वीकृत पदों की सीमा |
|---|---|---|
| PACS/PCCS | बकाया ऋण/जमा के आधार पर Class A/B/C | Class A तक 7 पद, Class B तक 6, Class C तक 4 |
| CMS | वार्षिक टर्नओवर के आधार पर Category A/B/C/D | Category A तक 14 पद, घटते क्रम में D तक 4 |
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि एक छोटी PACS में सिर्फ़ प्रबंधक व एक-दो अन्य पद ही स्वीकृत हो सकते हैं, जबकि बड़ी, अधिक कारोबार वाली समिति में पूरी टीम। इसलिए कोई नई भर्ती करने से पहले यह जाँचना ज़रूरी है कि आपकी समिति के वर्ग में वह पद स्वीकृत है भी या नहीं — स्वीकृत-संख्या से ज़्यादा भर्ती अवैध मानी जाती है और ऑडिट/रजिस्ट्रार-आपत्ति बनती है।
भर्ती-प्रक्रिया में दो अलग भूमिकाएँ हैं — चयन (selection) और अंतिम नियुक्ति (appointment) — और दोनों अलग-अलग प्राधिकारियों के पास हैं:
यह "चयन एक के पास, नियुक्ति दूसरे के पास" वाली व्यवस्था जानबूझकर बनाई गई है — ताकि न तो रजिस्ट्रार-तंत्र अकेले किसी को थोप सके, न ही समिति मनमाने ढंग से किसी को चुन ले। दोनों की सहमति से ही भर्ती पूरी होती है, जो पारदर्शिता व संतुलन देती है।
आधिकारिक PACS/PCCS नियमों के अनुसार, रिक्तियों का विज्ञापन कम-से-कम 30 दिन की सूचना देकर अंग्रेज़ी व हिन्दी अख़बारों में प्रकाशित किया जाता है; फिर आवेदन-जाँच, चयन-समिति की सिफ़ारिश, और अंत में प्रबंध समिति की मंज़ूरी। हर चरण का लिखित रिकॉर्ड (विज्ञापन, आवेदन, मेरिट-सूची, कार्यवृत्त) रखना ज़रूरी है — यही आगे किसी विवाद या ऑडिट में बचाव बनता है।
CMS में एक अतिरिक्त शर्त भी है — 2003 के मूल नियमों में 31 जनवरी 2011 के संशोधन से जोड़े गए नियम 3 के तहत, नियुक्ति को मंज़ूरी देने वाली बोर्ड बैठक में तीन अधिकारियों — सहायक रजिस्ट्रार, इंस्पेक्टर कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ और ज़िला प्रबंधक HAFED — का मौजूद रहना अनिवार्य है।
यह तीन-अधिकारी वाली शर्त व्यवहार में कई बार विवाद का कारण बनी है — अगर इनमें से कोई अधिकारी किसी बोर्ड बैठक में मौजूद न हो, तो क्या पूरी भर्ती रद्द मानी जाएगी? Gaurav Mehla व अन्य बनाम राज्य हरियाणा (2026 INSC 641) में सुप्रीम कोर्ट ने इसका जवाब दिया।
केस का सार: थानेसर सहकारी विपणन-सह-प्रसंस्करण समिति (Thanesar Cooperative Marketing-cum-Processing Society) में 2014 में शुरू हुई भर्ती के तहत कुछ उम्मीदवार क्लर्क-कम-सेल्समैन व प्यून-कम-चौकीदार नियुक्त हुए। रिक्तियाँ विज्ञापित हुईं, इंटरव्यू हुए, और बोर्ड ने नियुक्तियाँ मंज़ूर कीं। बाद में इन नियुक्तियों को इस आधार पर चुनौती दी गई कि बोर्ड ने नियम 3 में अनिवार्य कुछ अधिकारियों की अनुपस्थिति में मंज़ूरी दी थी।
फ़ैसला: 11 जून 2026 को जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने भर्ती-प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा — विज्ञापन, चयन और अंतिम मंज़ूरी। कोर्ट ने माना कि अगर विज्ञापन व चयन के चरण सही तरीक़े से हुए हों, तो सिर्फ़ अंतिम मंज़ूरी वाली बैठक में किसी अधिकारी की अनुपस्थिति जैसी प्रक्रियागत चूक को "सुधार योग्य" (curable) माना जाएगा, न कि पूरी भर्ती को रद्द करने का आधार।
📘 कोर्ट का तर्क साफ़ था — उम्मीदवारों को प्रशासनिक अधिकारियों की चूक की सज़ा नहीं भुगतनी चाहिए। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फ़ैसला पलटते हुए समिति को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर तीनों अनिवार्य अधिकारियों (सहायक रजिस्ट्रार, इंस्पेक्टर व ज़िला प्रबंधक HAFED) की मौजूदगी में नई बोर्ड बैठक बुलाए। अगर पुनर्विचार पर उम्मीदवार पात्र व अयोग्य-नहीं पाए जाएँ, तो उन्हें फिर नियुक्त किया जाए, और उनकी पिछली (एक दशक से अधिक की) सेवा सभी उद्देश्यों के लिए गिनी जाए।
इसका मतलब क्या: यह फ़ैसला दोनों पक्षों के लिए संतुलन देता है — कर्मचारी की नौकरी सिर्फ़ प्रशासनिक चूक से नहीं जाती (curable irregularity), पर समिति को चूक सुधारकर विधिवत प्रक्रिया पूरी करनी ही पड़ती है। यानी "प्रक्रिया ज़रूरी है, पर प्रक्रिया की एक चूक अंत नहीं"। (यह मामला इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर अलग विस्तृत विश्लेषण भी उपलब्ध है — देखें: Gaurav Mehla सुप्रीम कोर्ट फ़ैसला।)
PACS/PCCS में सीधी भर्ती के लिए सामान्यतः आयु-सीमा 18 से 40 वर्ष है, और सेवानिवृत्ति की उम्र 58 वर्ष (प्यून-कम-चौकीदार के लिए 60 वर्ष) रखी गई है। हर पद के लिए शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग तय है — जैसे प्रबंधक/क्लर्क-कम-कैशियर के लिए सामान्यतः स्नातक व कंप्यूटर/लेखा-योग्यता, और निचले पदों के लिए कम। सटीक शर्तों के लिए संबंधित Staff Service Rules व उनके संशोधन देखना ज़रूरी है, क्योंकि यह समय-समय पर बदलते रहे हैं।
हर पद सिर्फ़ बाहरी (सीधी) भर्ती से नहीं भरा जाता — कुछ हिस्सा पदोन्नति (promotion) से, यानी समिति के मौजूदा कर्मचारियों को ऊपर के पद पर बढ़ाकर भी भरा जाता है। इससे अनुभवी कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है और संस्थागत अनुभव बना रहता है।
💡 पदोन्नति के लिए वरिष्ठता-सूची (seniority list) साफ़ व अद्यतन रखना ज़रूरी है — अधिकांश पदोन्नति-विवाद गलत या पुरानी वरिष्ठता-सूची से ही पैदा होते हैं। हर कर्मचारी की नियुक्ति-तिथि, पद व सेवा-रिकॉर्ड सटीक रखें।
इन सबका उद्देश्य एक ही है — कर्मचारी के साथ निष्पक्ष व नियम-सम्मत व्यवहार, ताकि न समिति मनमानी करे, न कर्मचारी असुरक्षित रहे।
हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम की धारा 37 रजिस्ट्रार को यह अधिकार देती है कि वह किसी एपेक्स सोसाइटी को निर्देश दे कि वह अपनी सदस्य केंद्रीय व प्राथमिक (primary) सोसाइटियों — जिनमें PACS भी शामिल हैं — के कर्मचारियों के लिए एक साझा "कॉमन कैडर" बनाए। धारा 37(2) के तहत रजिस्ट्रार, कैडर सोसाइटी के परामर्श से, ऐसे कर्मचारियों की भर्ती, सेवा-शर्तें व संख्या को नियमित करने वाले नियम बनाता है (और परंतुक के तहत किसी वर्ग को कैडर में जोड़/हटा सकता है)। यही कारण है कि PACS कर्मचारियों की भर्ती व सेवा-शर्तें रजिस्ट्रार द्वारा जारी आधिकारिक PACS Service Rules से — यानी एक केंद्रीकृत, मानकीकृत ढाँचे से — तय होती हैं, न कि हर समिति के अपने मनमाने नियमों से।
✅ ध्यान दें: यह "केंद्रीकृत नियमन" का अर्थ यह नहीं कि रजिस्ट्रार स्वयं हर नियुक्ति करता है — नियम रजिस्ट्रार बनाता है, पर असल चयन चयन-समिति (DRCS/ARCS) करती है और अंतिम नियुक्ति प्रबंध समिति। तबादले व अन्य विवरण संबंधित Service Rules तय करते हैं। इस कॉमन-कैडर व्यवस्था तथा धारा 38 की वार्षिक-निगरानी की पूरी तस्वीर के लिए देखें: PACS Service Rules: भर्ती, प्रमोशन व कॉमन कैडर।
अगर किसी बड़ी समिति या फ़ेडरेशन में सरकार की शेयर-पूँजी ₹10 लाख या उससे अधिक हो, तो धारा 31 के तहत रजिस्ट्रार/सरकार उस समिति के लिए एक प्रबंध निदेशक (Managing Director) नियुक्त कर सकती है — आमतौर पर एक IAS/HCS अधिकारी या सहकारिता विभाग का Class I/II अधिकारी। यह सामान्य PACS/CMS भर्ती-प्रक्रिया से अलग, विशेष स्थिति है, और आम कर्मचारी-भर्ती पर लागू नहीं होती।
सेवा-संबंधी विवादों के लिए सामान्य नियम धारा 102(1) है — पहले रजिस्ट्रार के पास मध्यस्थता (arbitration), सीधे सिविल कोर्ट नहीं (इस विषय की पूरी प्रक्रिया — समिति में विवाद हो तो कहाँ जाएँ)। लेकिन एक स्थिर, पुराना अपवाद भी है — Sonepat Co-operative Sugar Mills Ltd. बनाम Presiding Officer, Labour Court (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, 14 अगस्त 1986) में कोर्ट ने तय किया कि अगर कोई कर्मचारी Industrial Disputes Act, 1947 के तहत "वर्कमैन" (workman) की परिभाषा में आता है, तो वह लेबर कोर्ट का दरवाज़ा भी खटखटा सकता है — रजिस्ट्रार-मध्यस्थता एकमात्र रास्ता नहीं।
इसलिए सही फ़ोरम इस पर निर्भर करता है कि कर्मचारी "वर्कमैन" है या नहीं (यह पद की प्रकृति व कर्तव्यों से तय होता है, सिर्फ़ नाम से नहीं):
| स्थिति | सामान्य फ़ोरम |
|---|---|
| अधिकांश सेवा-विवाद | रजिस्ट्रार-मध्यस्थता (धारा 102) |
| "वर्कमैन" श्रेणी का कर्मचारी | लेबर कोर्ट (Industrial Disputes Act) भी |
| मौलिक अधिकार/रिट-योग्य मामला | हाईकोर्ट (सीमित — नीचे देखें) |
सीधे हाईकोर्ट में रिट याचिका (Article 226) की गुंजाइश सीमित है — सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन से कोई समिति "सरकारी संस्था" नहीं बन जाती, इस पर पूरी चर्चा यहाँ पढ़ें: क्या हाई कोर्ट सहकारी समिति के ख़िलाफ़ Writ सुन सकता है?
अगर कोई नियमित PACS/PCCS कर्मचारी सेवाकाल के दौरान मृत्यु या लापता हो जाए, तो परिवार को अलग से PACS/PCCS Employees (Compassionate Financial Assistance or Appointment) Policy, 2022 के तहत आर्थिक सहायता या नियुक्ति मिल सकती है। CMS के लिए एक अलग, ज़्यादा विस्तृत 2024 नीति है — पात्रता, प्राथमिकता-क्रम, सहायता की गणना व प्रक्रिया समेत पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें: CMS Ex-gratia व अनुकंपा सहायता नीति की पूरी गाइड।
समिति (नियोक्ता) के लिए:
कर्मचारी के लिए:
PACS में कितने पद स्वीकृत हो सकते हैं? — समिति के वर्गीकरण (Class A/B/C) के अनुसार अधिकतम 7 पद तक; मूल स्वीकृत पद 4 हैं (प्रबंधक, क्लर्क-कम-कैशियर, सेल्समैन, प्यून-कम-चौकीदार)। नियुक्ति की अंतिम मंज़ूरी कौन देता है? — चयन-समिति की सिफ़ारिश के बाद हमेशा प्रबंध समिति (Managing Committee)। चयन-समिति की अध्यक्षता कौन करता है? — प्रबंधक पद के लिए उप-रजिस्ट्रार (DRCS); बाकी पदों के लिए सहायक रजिस्ट्रार (ARCS)। पदोन्नति व सीधी भर्ती का अनुपात क्या है? — पद अनुसार अलग (जैसे प्रबंधक पर लगभग 70% सीधी, 30% पदोन्नति); सटीक अनुपात नवीनतम Staff Service Rules से जाँचें। अगर CMS की बोर्ड बैठक में कोई अनिवार्य अधिकारी मौजूद न हो तो क्या पूरी भर्ती रद्द हो जाएगी? — ज़रूरी नहीं; Gaurav Mehla (2026 INSC 641) के अनुसार, अगर विज्ञापन व चयन सही रहे हों तो यह चूक सुधार योग्य मानी जा सकती है। सेवा-विवाद के लिए पहला क़दम क्या है? — आमतौर पर धारा 102 के तहत रजिस्ट्रार के पास मध्यस्थता; "वर्कमैन" श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों के लिए लेबर कोर्ट भी एक विकल्प है। PACS कर्मचारियों की भर्ती/सेवा-शर्तें कौन तय करता है? — धारा 37 के तहत रजिस्ट्रार द्वारा बनाए कॉमन-कैडर Service Rules; तबादले जैसे विवरण उन्हीं नियमों से तय होते हैं, हर समिति अपने मन से नहीं। सेवानिवृत्ति की उम्र क्या है? — PACS/PCCS में सामान्यतः 58 वर्ष (प्यून-कम-चौकीदार के लिए 60), पर नवीनतम नियम से पुष्टि करें। क्या समिति बिना जाँच के किसी कर्मचारी को हटा सकती है? — नहीं; अनुशासनात्मक कार्रवाई में आरोप-पत्र, जवाब का मौका व जाँच (प्राकृतिक न्याय) ज़रूरी है।
हरियाणा में PACS/CMS की सेवा-व्यवस्था तीन परतों (अधिनियम → नियम → Staff Service Rules) पर टिकी है, और उसका हर बड़ा सवाल — कितने पद, कौन भर्ती करे, पदोन्नति कैसे हो, विवाद कहाँ जाए — इन्हीं में से किसी परत में तय होता है। दो सिद्धांत पूरे ढाँचे को समझने की कुंजी हैं: पहला, चयन व नियुक्ति की भूमिकाएँ अलग रखी गई हैं (संतुलन के लिए); और दूसरा, प्रक्रिया ज़रूरी है, पर एक सुधार-योग्य चूक पूरी भर्ती नहीं गिराती (Gaurav Mehla)। समिति के लिए सबक — हर चरण नियमानुसार व दस्तावेज़ी रखें; कर्मचारी के लिए — अपने रिकॉर्ड व अधिकार जानें, और सही फ़ोरम चुनें। यही जानकारी विवाद घटाती है और दोनों पक्षों को सुरक्षा देती है।
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📘 यह लेख उपरोक्त आधिकारिक स्रोतों + सक्रिय Knowledge Items से बना — Evidence Level A/B। नोट: पद-संख्या, आयु/सेवानिवृत्ति-सीमा, पदोन्नति-कोटा, वेतन व अन्य सेवा-शर्तें समय-समय पर संशोधित होती हैं — किसी वास्तविक भर्ती/सेवा-मामले में नवीनतम अधिसूचना व अपने ज़िले के रजिस्ट्रार-कार्यालय से पुष्टि ज़रूर करें। कोई विशेष कानूनी सलाह अपने अधिवक्ता/CA से लें।
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