"Ex-gratia" शब्द हरियाणा की सहकारी समितियों में दो बिल्कुल अलग-अलग चीज़ों के लिए इस्तेमाल होता है, और यही सबसे बड़ी उलझन की जड़ है। कोई इसे बोनस के बदले मिलने वाली राशि समझता है, कोई इसे मृत्यु के बाद परिवार को मिलने वाली सहायता। दोनों के नियम, दस्तावेज़ और प्राधिकारी पूरी तरह अलग हैं — यह गाइड दोनों को स्पष्ट रूप से अलग करती है, और CMS की 2024 वाली अनुकंपा-सहायता नीति को विस्तार से समझाती है।

दो तरह के Ex-gratia — पहले यह साफ़ करें

टाइप 1 — बोनस के बदले Ex-gratia: Payment of Bonus Act, 1965 हर संस्था पर अपने-आप लागू नहीं होता — छोटी या घाटे में चल रही सहकारी समितियों पर अक्सर यह क़ानूनी रूप से लागू ही नहीं होता। ऐसे में कई समितियां क़ानूनी बोनस की जगह अपनी मर्ज़ी से "Ex-gratia" नाम की एक अतिरिक्त राशि देती हैं। यह पूरी तरह समिति के अपने विवेक (discretion) और वित्तीय क्षमता पर निर्भर है — इसका कोई अलग, हरियाणा-व्यापी CMS दस्तावेज़ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं मिलता।

टाइप 2 — अनुकंपा (compassionate) Ex-gratia: सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर परिवार को दी जाने वाली आर्थिक सहायता या नियुक्ति। हरियाणा में इस टाइप के लिए ठोस, दस्तावेज़ी नीतियां मौजूद हैं — CMS के लिए और PACS/PCCS के लिए अलग-अलग।

⚠️ हरियाणा सरकार का "Primary Cooperative Marketing-cum-Processing Society Ex-gratia Policy (2024)" नाम का दस्तावेज़ पढ़ते समय भ्रम हो सकता है — नाम में सिर्फ़ "Ex-gratia" होने से यह बोनस-जैसा (टाइप 1) लग सकता है, पर असल में यह पूरी तरह टाइप 2 यानी अनुकंपा सहायता/नियुक्ति की नीति है।

एक आम ग़लतफ़हमी — राज्य की सामान्य अनुकंपा नीति लागू नहीं होती

Haryana Civil Service (Compassionate Financial Assistance or Appointment) Rules, 2019 — जो एक पुरानी (1993 की) योजना को फिर से लागू करते हैं — सिर्फ़ "सरकारी कर्मचारियों" (Government employees) पर लागू होते हैं, अपने शीर्षक के हिसाब से ही। सहकारी समिति के कर्मचारी इसमें शामिल नहीं हैं — यह एक बहुत आम भ्रम की जड़ है। सहकारी समिति कर्मचारियों के लिए अलग, ख़ास नीतियां हैं — PACS/PCCS के लिए 2022 की नीति, और CMS के लिए 2024 का संशोधन।

CMS की 2024 वाली नीति — क्या बदला

रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटीज़, हरियाणा के 10 जुलाई 2024 के आदेश (Endst. No. 8/18/87/Mkt-II/13952-14127) से "Primary Cooperative Marketing-cum-Processing Societies Ltd. Staff Service Rules" में चौथा संशोधन (4th Amendment), 2024 किया गया — यह आदेश हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम 1984 की धारा 37 और नियम 1989 के नियम 29 के तहत जारी हुआ।

इस संशोधन ने CMS के 2003 वाले Staff Service Rules के नियम 6(c) "Ex-Gratia Assistance" को पूरी तरह बदल दिया — पुरानी व्यवस्था में सेवाकाल में मृत्यु होने पर आश्रितों को एक तय, फ्लैट ₹2.50 लाख की एकमुश्त राशि मिलती थी। नई व्यवस्था (10 जुलाई 2024 से प्रभावी) इस फ्लैट राशि की जगह एक विस्तृत, स्तरीय (tiered) नीति लाई — Annexure-E, "Cooperative Marketing-cum-Processing Society (Compassionate Financial Assistance or Appointment) Policy, 2024" — जिसका पूरा वित्तीय भार संबंधित समिति को अपने ही फंड से उठाना है।

💡 व्यावहारिक असर यह है कि पुरानी फ्लैट राशि की तुलना में नई व्यवस्था कई मामलों में — ख़ासकर लंबी अवधि की मासिक सहायता या अनुकंपा नियुक्ति के रूप में — कहीं ज़्यादा मूल्यवान हो सकती है।

पात्रता की शर्तें

यह नीति नियमित आधार पर काम कर रहे CMS कर्मचारी के परिवार पर लागू होती है, अगर वह सेवाकाल के दौरान मृत्यु या लापता हो जाए (नीति जारी होने के बाद हुई आत्महत्या से मृत्यु के मामले भी शामिल हैं)। अनुकंपा नियुक्ति के लिए तीन शर्तें एक साथ पूरी होनी ज़रूरी हैं — कर्मचारी ने नियमित आधार पर कम-से-कम 5 साल की सेवा पूरी की हो (स्वीकृत छुट्टी भी गिनी जाती है), मृत्यु/लापता होने के समय उम्र 52 साल से अधिक न हुई हो, और उस पर धोखाधड़ी, आतंकी संगठन से जुड़ाव या विदेश भाग जाने का संदेह न हो।

⚠️ नीति स्पष्ट करती है कि अनुकंपा नियुक्ति कोई "अधिकार" (matter of right) नहीं है — यह रिक्त पद की उपलब्धता सहित सभी शर्तों की पूर्ति पर निर्भर है। आकस्मिक/दिहाड़ी/अंशकालिक, कंटिंजेंसी-भुगतान वाले, वर्क-चार्ज्ड, ठेके/तदर्थ/DC-रेट पर नियुक्त, रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्त, या जिनकी नियुक्ति अदालत में विवादित/सेवा-नियम के उल्लंघन में हुई हो — ऐसे कर्मचारी "CMS employee" की परिभाषा से बाहर हैं।

परिवार में प्राथमिकता-क्रम

आर्थिक सहायता के लिए: विधवा/विधुर (पुनर्विवाह या मृत्यु तक) → न्यायिक रूप से अलग हुए पति/पत्नी (व्यभिचार के आधार पर अलगाव न हो तो) → निःसंतान विधवा जिसने पुनर्विवाह न किया हो → सबसे बड़ा अविवाहित/आश्रित पुत्र-पुत्री (25 वर्ष तक) → 25 वर्ष से कम की तलाकशुदा/विधवा पुत्री → 25 वर्ष से अधिक की अविवाहित/विधवा/तलाकशुदा पुत्री → दिव्यांग पुत्र-पुत्री (उम्र-सीमा नहीं, पूर्ण आश्रित होने पर) → आश्रित माता-पिता → अविवाहित दिव्यांग भाई-बहन।

अनुकंपा नियुक्ति के लिए क्रम कुछ अलग है — विधवा/विधुर → बच्चे (बशर्ते पहले से किसी सरकारी/सहकारी नौकरी में न हों) → आश्रित भाई-बहन (सिर्फ़ अविवाहित मृतक/लापता कर्मचारी के मामले में)।

मासिक सहायता कितने समय तक मिलेगी

मृत्यु के समय उम्र मासिक सहायता की अवधि
35 वर्ष पूरी होने से पहले 15 साल तक (शर्तों के अधीन)
35 के बाद, 48 से पहले 12 साल तक, या सेवानिवृत्ति/60 वर्ष तक — जो पहले हो
48 वर्ष या उससे अधिक 7 साल तक, या सेवानिवृत्ति/60 वर्ष तक — जो पहले हो

राशि की गणना मृतक के आख़िरी मूल वेतन (basic pay) के आधार पर होती है, जिसमें महंगाई भत्ता (DA) तय दर पर जुड़ता है, पर कोई वार्षिक वेतन-वृद्धि या अन्य भत्ता शामिल नहीं होता। जिस परिवार की कुल आय (सभी स्रोतों से) मृतक के कुल वेतन से कम हो, वही "dependent" माना जाता है।

प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी

संबंधित CMS का Board of Directors/Board of Administration (BOD/BOA), संबंधित DRCS (Deputy Registrar) की पूर्व-स्वीकृति के अधीन, अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी है। मृत्यु की सूचना मिलने पर समिति का प्रबंधक या वरिष्ठतम कर्मचारी परिवार को दस्तावेज़ों की सूची भेजता है, जांच के बाद ARCS/DRCS को सिफ़ारिश भेजी जाती है, और DRCS की स्वीकृति के बाद BOD/BOA की बैठक में अंतिम निर्णय होता है।

ज़रूरी दस्तावेज़ों में आवेदन, आय प्रमाण-पत्र, विवाह/पुनर्विवाह प्रमाण-पत्र (जहां लागू हो), दिव्यांग बच्चे का मेडिकल प्रमाण-पत्र, और यह प्रमाण-पत्र कि सहायता पाने वाले के ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला अदालत में लंबित नहीं है, शामिल हैं। मृतक के परिवार को नियुक्ति के लिए आवेदन मृत्यु की तारीख़ से 6 महीने के भीतर देना होता है। अगर एक साल के भीतर रिक्त पद न होने के कारण नियुक्ति नहीं दी जा सकी, तो उस स्थिति में मासिक सहायता पूर्वप्रभावी (retrospective) रूप से मंज़ूर की जाती है।

⚠️ सहायता पाने वाले व्यक्ति को हर साल मार्च और सितंबर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जीवन-प्रमाण पत्र व आय-प्रमाण पत्र किसी राजपत्रित अधिकारी, सरपंच या नगर पार्षद से सत्यापित कराकर देना ज़रूरी है — ऐसा न करने पर सहायता रुक सकती है। अगर सहायता एक साल से ज़्यादा समय तक ली ही न जाए, तो वह अपने-आप बंद (lapse) हो जाती है — बाद में दावा करने पर ARCS संबंधित परिस्थितियों की जांच के बाद उसे दोबारा शुरू कर सकता है, पर तीन साल से पुराने दावों पर निर्णय DRCS स्तर पर होता है।

कब दावा नहीं बनता, या सहायता कब रुक जाती है

एक ज़रूरी क़ानूनी पहलू — क्या सहकारी समिति "सरकार" (State) है?

Ex-gratia के दावे रुकने या नकारे जाने पर अक्सर सवाल उठता है — क्या इसके ख़िलाफ़ सीधे हाईकोर्ट में रिट याचिका (Article 226) दायर की जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट की पांच-जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया है कि राज्य के सहकारी क़ानून के तहत पंजीकृत समितियां अपने-आप Article 12 के तहत "State" नहीं मानी जातीं — इसके लिए वित्तीय प्रभुत्व, कार्यात्मक अनिवार्यता और विशिष्ट प्रशासनिक नियंत्रण, तीनों शर्तें एक साथ चाहिए। इस टेस्ट और उससे जुड़े मामलों (जैसे किसी वैधानिक नियम के उल्लंघन पर writ चल सकने का अपवाद) की पूरी चर्चा यहाँ पढ़ें: क्या हाई कोर्ट सहकारी समिति के ख़िलाफ़ Writ सुन सकता है?

एक जुड़ा सबक़ भी याद रखने लायक़ है — Samarjit Singh बनाम State of Punjab (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट) में कोर्ट ने एक ऐसे नियम को ही रद्द कर दिया जो सहकारी समिति कर्मचारियों को सरकार-समान लाभ देने की बात करता था, क्योंकि वह नियम बनाने का अधिकार ही ग़लत प्राधिकारी (Registrar) को सौंपा गया था, जबकि क़ानून में यह शक्ति सिर्फ़ राज्य सरकार के पास थी। इसका सबक़ — किसी नीति की ताक़त सिर्फ़ उसमें क्या लिखा है, इस पर नहीं, बल्कि उसे बनाने का अधिकार सही प्राधिकारी के पास था या नहीं, इस पर भी निर्भर करती है।

अगर दावा रुका या नकारा गया हो — व्यावहारिक क़दम

  1. सही नीति पहचानें — आपका मामला टाइप 1 (बोनस के बदले) है या टाइप 2 (अनुकंपा सहायता/नियुक्ति) — दोनों की शर्तें व प्राधिकारी अलग हैं।
  2. लिखित नीति मांगें — समिति के सचिव या संबंधित ARCS कार्यालय से पूरी लिखित प्रति मांगें; न मिले तो RTI Act, 2005 के तहत आवेदन करें।
  3. वैधानिक बनाम प्रशासनिक फ़र्क़ समझें — क्या दावा किसी लिखित प्रावधान के स्पष्ट उल्लंघन पर आधारित है, या सिर्फ़ भुगतान में देरी जैसा प्रशासनिक मामला है — यह सही फ़ोरम तय करता है।
  4. सही फ़ोरम चुनें — सामान्य सेवा-विवाद के लिए धारा 102 के तहत रजिस्ट्रार-मध्यस्थता; "वर्कमैन" श्रेणी के लिए लेबर कोर्ट; विशुद्ध वैधानिक-उल्लंघन के मामलों में सीमित दायरे में हाईकोर्ट रिट।
  5. दस्तावेज़ संभालकर रखें — नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, समिति के प्रस्ताव और किसी भी लिखित आश्वासन/इनकार की कॉपी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Ex-gratia के दोनों टाइप में क्या फ़र्क़ है? — टाइप 1 बोनस के बदले (समिति के विवेक पर), टाइप 2 मृत्यु/लापता होने पर परिवार को अनुकंपा सहायता/नियुक्ति — शर्तें व दस्तावेज़ दोनों अलग हैं। क्या राज्य सरकार की सामान्य Civil Service Compassionate Rules, 2019 सहकारी समिति कर्मचारियों पर लागू होती हैं? — नहीं; वे सिर्फ़ सरकारी कर्मचारियों के लिए हैं। CMS व PACS/PCCS की अपनी अलग नीतियां हैं। CMS की 2024 नीति में पुरानी फ्लैट ₹2.50 लाख राशि की जगह क्या आया? — एक स्तरीय (tiered) व्यवस्था — उम्र के अनुसार 7 से 15 साल तक मासिक सहायता, या अनुकंपा नियुक्ति। अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कब तक करना होता है? — मृत्यु की तारीख़ से 6 महीने के भीतर। अनुकंपा नियुक्ति क्या एक "अधिकार" है? — नहीं; यह रिक्त पद की उपलब्धता सहित सभी शर्तों की पूर्ति पर निर्भर एक सहायता है, दावा-योग्य अधिकार नहीं। सहायता जारी रखने के लिए हर साल क्या करना होता है? — मार्च व सितंबर में व्यक्तिगत रूप से जीवन-प्रमाण व आय-प्रमाण सत्यापित कराकर देना — न देने पर सहायता रुक सकती है। सक्षम प्राधिकारी कौन है? — संबंधित CMS का BOD/BOA, DRCS की पूर्व-स्वीकृति के अधीन।

तीन बातें याद रखें

आख़िर में

Ex-gratia को लेकर सबसे बड़ी उलझन उसके दो अलग अर्थों में है — इसलिए किसी भी दावे से पहले यह पक्का करें कि आपका मामला बोनस-जैसा (टाइप 1) है या अनुकंपा-सहायता (टाइप 2)। CMS की 2024 नीति ने पुरानी फ्लैट ₹2.50 लाख राशि की जगह एक स्तरीय, अक्सर अधिक मूल्यवान व्यवस्था दी है — पर इसका पूरा भार समिति के अपने फंड पर है, और लाभ सख़्त पात्रता, समयसीमा व दस्तावेज़ों के अधीन है। सबसे ज़रूरी बात — राज्य की सामान्य सरकारी अनुकंपा नीति सहकारी कर्मचारियों पर लागू नहीं होती; उनकी अपनी अलग नीति है। इसलिए परिवार को चाहिए कि वह सही नीति पहचाने, समय पर (6 महीने में) आवेदन करे, दस्तावेज़ पूरे रखे, और ज़रूरत पड़ने पर सही फ़ोरम व विशेषज्ञ-सलाह ले।

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जुड़े शब्द: Ex-gratia · अनुकंपा नियुक्ति · DRCS · धारा 37 · dependent

📘 नोट: यह सामान्य जानकारी है, हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम 1984 (धारा 37) व नियम 1989 (नियम 29), CMS Staff Service Rules के 4th Amendment 2024 (RCS आदेश 10 जुलाई 2024) व संबंधित नीतियों पर आधारित। नीति-विवरण, राशि व शर्तें समय के साथ बदल सकती हैं — सटीक, वर्तमान प्रावधान अपनी समिति/ARCS/DRCS या मूल आदेश से पुष्टि करें; विशिष्ट मामले में क़ानूनी विशेषज्ञ से सलाह लें। Evidence Level A (शैक्षिक)।

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