CM-PACS क्या है और यह कितने तरह के कारोबार कर सकती है, यह जान लेने के बाद असली सवाल आता है — अपने गांव या पंचायत-क्लस्टर में CM-PACS खड़ी करने के लिए आवेदन कहाँ से शुरू करें, कितने लोग चाहिए, कौन-से दस्तावेज़ तैयार रखें, और इसमें असल में कितना समय व खर्च लगता है? यह गाइड पूरी प्रक्रिया — क़ानूनी शर्तों से लेकर व्यावहारिक तैयारी तक — एक जगह समेटती है।
हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम 1984 की धारा 7 के अनुसार आवेदन प्रस्तावित बाय-लॉज़ के साथ रजिस्ट्रार के पास भेजा जाता है, और प्राइमरी सोसाइटी के लिए सामान्य शर्त कम-से-कम 10 योग्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर की है। पर CM-PACS के लिए हरियाणा सहकारिता विभाग ने ख़ासतौर पर न्यूनतम सदस्य संख्या 11 तय की है — यानी सामान्य शर्त से एक ज़्यादा। नियम 4 एक और शर्त जोड़ता है: सोसाइटी में कम-से-कम 5 अलग-अलग परिवारों के लोग शामिल होने चाहिए (जब तक कि कोई सदस्य ख़ुद कोई सहकारी सोसाइटी न हो)।
⚠️ सिर्फ़ 11 दस्तख़त जुटाना काफ़ी नहीं — आवेदकों का ताल्लुक़ कम-से-कम 5 अलग-अलग घरों से भी होना चाहिए। यह गिनती जितनी बार भूली जाती है, उतनी ही बार आवेदन में देरी होती है।
पूरी प्रक्रिया अब हरियाणा सहकारिता विभाग के पोर्टल cooponline.rcsharyana.gov.in के ज़रिए ऑनलाइन होती है। आवेदकों को पहले ख़ुद को पोर्टल पर रजिस्टर करना होता है, फिर अपने इलाके के ARCS (सहायक रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां) के पास ऑनलाइन आवेदन करना होता है — फ़ॉर्म भरना, उसका PDF निकालकर हस्ताक्षर करवाना, और बाय-लॉज़ की स्कैन कॉपी अपलोड करना। नियम 5 के अनुसार यह आवेदन "फ़ॉर्म I" में दिया जाता है, और आवेदकों में से किसी एक का नाम-पता देना होता है ताकि रजिस्ट्रार आगे की चिट्ठी-पत्री कर सके।
एक राहत की बात — आम सहकारी सोसाइटी के उलट, CM-PACS के लिए नए बाय-लॉज़ ख़ुद लिखने की ज़रूरत नहीं। हरियाणा सरकार के मेमो PA/RCS/225-275 (25.12.2023) से जारी Model Bye-laws पहले से सभी ज़िलों में लागू हैं — बस सोसाइटी का नाम, कार्यक्षेत्र और शुरुआती सदस्यों के नाम भरने होते हैं। नियम 6 के अनुसार इनकी 3 हस्ताक्षरित प्रतियाँ आवेदन के साथ लगानी होती हैं (हर प्रति पर कम-से-कम 2 आवेदकों के हस्ताक्षर)।
आवेदन अपने-आप मंज़ूर नहीं हो जाता। पहले ARCS कार्यालय आवेदन स्वीकार करता है, फिर एक इंस्पेक्टर मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (physical verification) करता है — बताए गए सदस्य असल में मौजूद हैं या नहीं, उनका ताल्लुक़ बताए गए इलाके से है या नहीं। इसके बाद ARCS अपनी सिफ़ारिश के साथ फ़ाइल आगे भेजता है।
धारा 8 तय करती है कि रजिस्ट्रार किन बातों से संतुष्ट होकर सोसाइटी रजिस्टर करेगा — आवेदन क़ानून के मुताबिक़ हो, मक़सद सहकारी सिद्धांतों के अनुरूप हो, बाय-लॉज़ अधिनियम के ख़िलाफ़ न हों, और प्रस्तावित सोसाइटी की सफलता की "उचित संभावना" हो। इसी धारा में एक अहम समयसीमा भी है — रजिस्ट्रार को आवेदन मिलने की तारीख़ से 2 महीने के भीतर फ़ैसला लेना होता है।
मंज़ूरी मिलने पर नियम 7(2) के तहत सोसाइटी को रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट (फ़ॉर्म II में) और रजिस्टर्ड बाय-लॉज़ की कॉपी मिलती है। धारा 9 के अनुसार यह सर्टिफ़िकेट ख़ुद इस बात का पक्का सबूत है कि सोसाइटी वैध रूप से रजिस्टर हो चुकी है — इसके बाद ही सोसाइटी बैंक खाता खोलने, ज़मीन ख़रीदने या करार करने जैसे काम शुरू कर सकती है। अगर आवेदन ठुकरा दिया जाए, तो नियम 9 के अनुसार सभी आवेदकों के हस्ताक्षर से (या 10 से ज़्यादा आवेदक होने पर कम-से-कम 2/3 के हस्ताक्षर से) अपील की जा सकती है।
| क्या तैयार रखें | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| 11 आवेदक, 5 अलग-अलग परिवारों से | नियम 4 की अनिवार्य शर्त |
| पहचान व पते का प्रमाण (आधार/वोटर ID) | इंस्पेक्टर का फ़ील्ड वेरिफिकेशन सबसे पहले यही जाँचता है |
| परिवार पहचान पत्र व CIBIL जानकारी | सदस्यता KYC का हिस्सा |
| किसान सदस्यों के लिए MFMB रजिस्ट्रेशन | Model Bye-laws में किसान सदस्यों के लिए अनिवार्य |
| ज़मीन के दस्तावेज़ (जहाँ लागू हो) | सदस्यता की शर्त — 5 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन न होना |
| प्रस्तावित नाम व कार्यक्षेत्र | रजिस्ट्रेशन के बाद बदलना आसान नहीं |
| Model Bye-laws की 3 हस्ताक्षरित प्रतियाँ | नियम 6 — हर प्रति पर 2 आवेदकों के हस्ताक्षर |
| प्रस्तावित प्रबंध समिति के नाम (7-21 सदस्य) | SC/महिला/पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व धारा 28 के तहत अनिवार्य |
| प्रवेश शुल्क व शेयर पूँजी की व्यवस्था | मंज़ूरी के बाद तुरंत ₹1,000+₹1,000 प्रति सदस्य चाहिए |
| संपर्क मोबाइल व ईमेल | पोर्टल-आधारित प्रक्रिया, सारी चिट्ठी-पत्री इसी पर |
क़ानून की किताब में तस्वीर साफ़ है — 2 महीने में फ़ैसला। पर ज़मीन पर रफ़्तार अलग रही है: जुलाई 2025 में हरियाणा सरकार ने 500 CM-PACS का लक्ष्य रखा था, पर उस समय तक सिर्फ़ 141 ही बन पाई थीं। दो महीने की समयसीमा एक आवेदन पर लागू होती है, पर पूरे राज्य में सैकड़ों नई समितियाँ बनाने की रफ़्तार कहीं धीमी रही।
ज़्यादातर देरी क़ानून की वजह से नहीं, प्रक्रिया के व्यावहारिक हिस्सों में होती है — दूर-दराज़ गाँवों में इंस्पेक्टर का फ़ील्ड वेरिफिकेशन शेड्यूल होने में समय, अधूरे दस्तावेज़ों से फ़ाइल का वापस लौटना, और कार्यक्षेत्र/प्रबंध समिति पर आपसी सहमति बनाने में लगने वाला समय — यह आख़िरी हिस्सा तो क़ानून के दायरे से पूरी तरह बाहर, स्थानीय स्तर पर तय होता है।
⚠️ हरियाणा सहकारी समिति नियम 1989 में रजिस्ट्रेशन के लिए कोई निश्चित फ़ीस राशि ख़ुद नियमों में दर्ज नहीं — नियम 80/82 जैसी भाषा में फ़ीस "समय-समय पर रजिस्ट्रार द्वारा, सरकार की मंज़ूरी से तय स्तर के मुताबिक़" ली जाती है। सही व मौजूदा फ़ीस जानने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा अपने ARCS कार्यालय से सीधे पूछना है — इंटरनेट पर मिलने वाला पुराना आँकड़ा भरोसे लायक़ नहीं।
पक्के तौर पर जो जानना ज़रूरी है — मंज़ूरी के बाद हर सदस्य को ₹1,000 प्रवेश शुल्क (non-refundable) और ₹1,000 का एक शेयर जमा करना होता है। 11 सदस्यों के लिए यह शुरुआती सदस्यता-पूँजी क़रीब ₹22,000 (11 × ₹2,000) बैठती है — इसके ऊपर सरकारी फ़ीस, स्टाम्प पेपर और दस्तावेज़ीकरण का खर्च अलग से जुड़ता है।
रजिस्ट्रेशन के साथ ही समिति को अपनी प्रबंध समिति (management committee) गठित करनी होती है — दस्तावेज़ चेकलिस्ट में बताए अनुसार आमतौर पर 7 से 21 सदस्य। यहाँ एक अहम बात — धारा 28 के तहत बोर्ड में अनुसूचित जाति, महिला व पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। यानी प्रबंध समिति सिर्फ़ कुछ प्रभावशाली लोगों का समूह नहीं, बल्कि समाज के विविध हिस्सों का प्रतिनिधित्व करती है — यही सहकारिता की समावेशी भावना है। शुरुआती प्रबंध समिति के नाम आवेदन के समय ही तय रखना बेहतर है, ताकि बाद में जल्दबाज़ी न हो।
सर्टिफ़िकेट (फ़ॉर्म II) मिलते ही समिति एक स्वतंत्र क़ानूनी संस्था बन जाती है, पर काम-लायक होने के लिए कुछ पहले क़दम ज़रूरी हैं:
इन क़दमों को व्यवस्थित ढंग से करने पर समिति शुरुआत से ही अनुशासित व अनुपालन-योग्य बनती है।
मोटे तौर पर राह ऐसी दिखती है — सदस्य व दस्तावेज़ जुटाना (कुछ दिन-हफ़्ते, स्थानीय सहमति पर निर्भर) → पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन → ARCS स्वीकृति व इंस्पेक्टर का फ़ील्ड वेरिफिकेशन → रजिस्ट्रार का निर्णय (धारा 8: अधिकतम 2 महीने) → सर्टिफ़िकेट। सबसे ज़्यादा समय अक्सर आवेदन से पहले (सहमति व दस्तावेज़) व फ़ील्ड वेरिफिकेशन में लगता है, क़ानूनी निर्णय-चरण में कम। इसलिए तैयारी जितनी पूरी, प्रक्रिया उतनी तेज़।
व्यवहार में आवेदन इन्हीं वजहों से अटकते हैं — 11 सदस्य तो जुटा लिए पर 5 अलग परिवारों की शर्त भूल गए; दस्तावेज़ अधूरे (MFMB/PPP छूटा); प्रस्तावित नाम/कार्यक्षेत्र पर आपसी असहमति; या फ़ीस/प्रक्रिया की ग़लत जानकारी पर भरोसा। इन सबसे बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा — आवेदन से पहले ही ARCS कार्यालय से पुष्टि कर लेना। (विस्तार से: CM-PACS की आम गलतियाँ।)
CM-PACS रजिस्टर कराने के लिए कम-से-कम कितने सदस्य चाहिए? — 11, जो कम-से-कम 5 अलग-अलग परिवारों से हों। रजिस्ट्रेशन में क़ानूनी तौर पर कितना समय लगता है? — धारा 8 के तहत अधिकतम 2 महीने, पर व्यावहारिक अनुभव इससे ज़्यादा भी रहा है। नए बाय-लॉज़ ख़ुद लिखने पड़ते हैं? — नहीं, RCS हरियाणा के तैयार Model Bye-laws अपनाने होते हैं — बस नाम व कार्यक्षेत्र भरना है। रजिस्ट्रेशन फ़ीस कितनी है? — नियमों में निश्चित नहीं, रजिस्ट्रार के अलग आदेश से तय होती है — अपने ARCS कार्यालय से पुष्टि करें। आवेदन कहाँ जमा होता है? — हरियाणा सहकारिता विभाग के पोर्टल cooponline.rcsharyana.gov.in पर, अपने इलाके के ARCS के पास (फ़ॉर्म I, नियम 5)। बाय-लॉज़ की कितनी प्रतियाँ? — 3 हस्ताक्षरित प्रतियाँ (नियम 6), हर प्रति पर कम-से-कम 2 आवेदकों के हस्ताक्षर। आवेदन ठुकराने पर क्या? — नियम 9 के तहत सभी आवेदकों (या 10+ होने पर कम-से-कम 2/3) के हस्ताक्षर से अपील की जा सकती है। शुरुआती पूँजी कितनी लगती है? — 11 सदस्यों के लिए लगभग ₹22,000 (11×₹2,000) सदस्यता-पूँजी; ऊपर से सरकारी फ़ीस, स्टाम्प व दस्तावेज़ीकरण अलग। रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद क्या करें? — बैंक खाता खोलें, शेयर/प्रवेश-शुल्क जमा कराएँ, पहली आम सभा व बोर्ड बैठक करें, और पहले दिन से हिसाब शुरू करें। प्रबंध समिति में कौन-कौन ज़रूरी? — 7-21 सदस्य, जिनमें धारा 28 के तहत SC/महिला/पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। सबसे ज़्यादा देरी कहाँ होती है? — क़ानूनी निर्णय में नहीं, बल्कि आवेदन-पूर्व तैयारी (सहमति, दस्तावेज़) व फ़ील्ड वेरिफिकेशन में — इसलिए तैयारी पूरी रखें। किसान सदस्यों के लिए कौन-सा दस्तावेज़ अनिवार्य? — Model Bye-laws के अनुसार MFMB (मेरी फ़सल मेरा ब्यौरा) रजिस्ट्रेशन; साथ ही 5 एकड़ से अधिक ज़मीन न होने की शर्त।
CM-PACS रजिस्ट्रेशन की क़ानूनी राह साफ़ है — धारा 7 से आवेदन, धारा 8 से 2-महीने में निर्णय, धारा 9 से मान्यता। पर असली मेहनत क़ानून में नहीं, तैयारी में है — 11 सदस्य (5 अलग परिवारों से), पूरे दस्तावेज़, तैयार Model Bye-laws, और आपसी सहमति। जो समूह यह तैयारी पहले से कर लेता है, उसका आवेदन तेज़ी से आगे बढ़ता है; जो जल्दबाज़ी में अधूरे दस्तावेज़ लेकर पहुँचता है, वही देरी झेलता है। इसलिए आवेदन से पहले एक बार ARCS कार्यालय से पूरी प्रक्रिया व दस्तावेज़-सूची की पुष्टि कर लेना सबसे समझदारी भरा क़दम है। और फ़ीस जैसी बदलती बातों के लिए हमेशा ARCS कार्यालय ही अंतिम व भरोसेमंद स्रोत है — इंटरनेट पर मिलने वाले पुराने आँकड़ों पर नहीं, बल्कि आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
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जुड़ी पढ़ाई: CM-PACS क्या है · हरियाणा अधिनियम 1984 व नियम 1989 · समिति का सामान्य पंजीकरण कैसे करें
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📘 स्रोत: हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम 1984 व नियम 1989 (धारा 7/8/9/28, नियम 4/5/6/7/9), मेमो PA/RCS/225-275 (25.12.2023) व CM-PACS विस्तार की क्षेत्रीय रिपोर्टें (141/500, जुलाई 2025)। फ़ीस व योजना-विवरण समय के साथ बदलते हैं — ARCS/सहकारिता विभाग से पुष्टि करें। यह कानूनी सलाह नहीं है। Evidence Level B।
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