नई सहकारी समिति शुरू करने का पहला क़ानूनी क़दम है पंजीकरण (registration)। पंजीकृत होते ही समिति को अलग क़ानूनी पहचान मिलती है। यह लेख पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में बताता है।
पंजीकरण के बाद समिति एक अलग क़ानूनी संस्था (body corporate) बन जाती है — अपने नाम से खाता, संपत्ति, अनुबंध व मुक़दमा कर सकती है, और उसकी देनदारी सदस्यों से अलग होती है। बिना पंजीकरण के ये सुरक्षा नहीं मिलतीं।
आवेदन सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (Registrar of Cooperative Societies — RCS) के पास होता है — राज्य के सहकारी अधिनियम के तहत। एक से ज़्यादा राज्यों में काम करने वाली समिति Multi-State Cooperative Societies Act, 2002 के तहत केंद्रीय रजिस्ट्रार के पास आवेदन करती है।
| चरण | क्या |
|---|---|
| प्रवर्तक समूह | न्यूनतम सदस्य जुटाना |
| उपविधि | प्रस्तावित नियम-पुस्तक |
| आवेदन | RCS को दस्तावेज़ सहित |
| प्रमाणपत्र | क़ानूनी पहचान |
⚠️ ध्यान दें: सटीक न्यूनतम सदस्य, शुल्क व दस्तावेज़ राज्य के सहकारी अधिनियम व नियमों के अनुसार बदलते हैं — अपने राज्य के RCS कार्यालय से पुष्टि करें।
सहकारी समिति का पंजीकरण कैसे होता है? — RCS के पास उपविधि व दस्तावेज़ सहित आवेदन → जाँच → पंजीकरण प्रमाणपत्र। कहाँ आवेदन करें? — राज्य के RCS (एक राज्य), या केंद्रीय रजिस्ट्रार (बहु-राज्य, 2002 अधिनियम)। न्यूनतम कितने सदस्य? — राज्य अधिनियम/प्रकार अनुसार, अक्सर 10। पंजीकरण से क्या मिलता है? — अलग क़ानूनी पहचान व सीमित देनदारी।
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