गाँव-देहात की सहकारी समिति, PACS या सहकारी बैंक चलाते समय "NABARD" नाम बार-बार आता है — पुनर्वित्त (refinance) में, निरीक्षण में, योजनाओं में। यह लेख सीधे-सीधे बताता है कि NABARD है क्या और आपकी समिति से इसका क्या नाता है।
NABARD यानी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development)। इसकी स्थापना 12 जुलाई 1982 को हुई। यह कृषि और ग्रामीण विकास के लिए देश का शीर्ष (apex) विकास बैंक है। मुख्यालय मुंबई में है।
| पहलू | NABARD की भूमिका |
|---|---|
| कोष | सहकारी बैंकों/RRBs को पुनर्वित्त |
| निगरानी | सहकारी बैंकों व RRBs का पर्यवेक्षण |
| अवसंरचना | RIDF से ग्रामीण परियोजनाएँ |
| समावेशन | SHG-बैंक लिंकेज, माइक्रो-फाइनेंस |
💡 सीधा नाता: आपकी PACS को जो कर्ज़ जिला सहकारी बैंक से मिलता है, उसकी जड़ में अक्सर NABARD का पुनर्वित्त होता है।
NABARD से जुड़ी समितियों को अक्सर तय प्रारूप में रिपोर्ट/रिटर्न देने होते हैं और पुनर्वित्त की शर्तें निभानी होती हैं। इसलिए साफ़-सुथरी बही और समय पर रिपोर्ट ज़रूरी है। (देखें: NABARD व फेडरेशन रिटर्न और KCC व फसल ऋण लेखांकन।)
क्या NABARD सीधे किसान को कर्ज़ देता है? — आम तौर पर नहीं; यह बैंकों/समितियों के ज़रिये पुनर्वित्त देता है। NABARD किसके अधीन है? — भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) के अधीन; RBI के साथ मिलकर काम करता है। PACS का NABARD से क्या नाता? — PACS को कोष जिला/राज्य सहकारी बैंक से मिलता है, और उसे NABARD पुनर्वित्त देता है।
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