नई परियोजना, गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट या विपणन का काम शुरू करते समय समितियों के सामने "NCDC" का नाम आता है। यह लेख बताता है कि NCDC है क्या, यह NABARD से कैसे अलग है, और आपकी समिति को इससे क्या मिल सकता है।
NCDC यानी राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation)। इसे NCDC अधिनियम, 1962 के तहत बनाया गया और यह 1963 में काम में आया। इसका मकसद है सहकारी समितियों के ज़रिये उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात व आयात को बढ़ावा देना। अब यह सहकारिता मंत्रालय के अधीन है; मुख्यालय नई दिल्ली में।
| बिंदु | NCDC | NABARD |
|---|---|---|
| मुख्य काम | सहकारी समितियों को सीधे परियोजना-वित्त | बैंकों/समितियों को पुनर्वित्त |
| फोकस | उत्पादन, भंडारण, विपणन, प्रोसेसिंग | कृषि-ग्रामीण विकास, बैंकिंग पर्यवेक्षण |
| अधीन | सहकारिता मंत्रालय | वित्त मंत्रालय |
💡 आसान फर्क: बड़े ढाँचे/परियोजना (गोदाम, प्लांट) के लिए अक्सर NCDC, और बैंकिंग/पुनर्वित्त के लिए NABARD।
NCDC से ऋण/सहायता लेने पर उसका उपयोग, चुकौती और परियोजना-हिसाब अलग से साफ़ दिखना चाहिए — ताकि ऑडिट और आगे की किश्तों में दिक्कत न आए। परियोजना-वार खाते और सही आरक्षित/फंड लेखांकन यहाँ मदद करते हैं।
क्या NCDC सीधे समिति को कर्ज़ देता है? — हाँ, राज्य सरकार के ज़रिये या सीधे पात्र समितियों को। NCDC किस मंत्रालय के अधीन है? — सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation)। NCDC किन कामों के लिए है? — उत्पादन, प्रोसेसिंग, भंडारण, विपणन, निर्यात-आयात आदि सहकारी परियोजनाएँ।
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