समिति के पदाधिकारी: अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष की भूमिकाएँ

प्रबंध समिति के भीतर कुछ ख़ास ज़िम्मेदारियाँ कुछ लोगों को दी जाती हैं — यही पदाधिकारी हैं: अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष। हर एक की भूमिका अलग है। यह लेख उन्हें आसान भाषा में समझाता है।

अध्यक्ष (Chairman / President)

सचिव (Secretary)

अक्सर समिति का कार्यकारी (executive) — रोज़ का असली काम यहीं होता है:

💡 ज़्यादातर सहकारी समितियों में सचिव ही SahakarLekha जैसे सॉफ्टवेयर का मुख्य उपयोगकर्ता होता है — क्योंकि हिसाब-किताब व रिपोर्ट उसी की ज़िम्मेदारी है।

कोषाध्यक्ष (Treasurer)

पदाधिकारी मुख्य ज़िम्मेदारी
अध्यक्ष अध्यक्षता, प्रतिनिधित्व, मार्गदर्शन
सचिव रिकॉर्ड, प्रशासन, रोज़मर्रा संचालन, अनुपालन
कोषाध्यक्ष कोष, नकदी व बैंक की निगरानी

⚠️ ध्यान दें: पदाधिकारी कैसे चुने जाते हैं और उनकी सटीक शक्तियाँ राज्य अधिनियम व उपविधि तय करती हैं।

आंतरिक नियंत्रण से नाता

अच्छी व्यवस्था में एक बनाए, दूसरा मंज़ूर करे (Maker–Checker) — जैसे सचिव entry करे, अध्यक्ष/कोषाध्यक्ष बड़े भुगतान मंज़ूर करें। इससे गड़बड़ी की गुंजाइश घटती है और ऑडिट आसान रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिव की भूमिका क्या है? — रिकॉर्ड, कार्यवृत्त, रोज़मर्रा प्रशासन व अनुपालन — अक्सर समिति का कार्यकारी। अध्यक्ष की भूमिका क्या है? — बैठकों की अध्यक्षता, प्रतिनिधित्व व मार्गदर्शन। कोषाध्यक्ष क्या करता है? — कोष, नकदी व बैंक लेन-देन की निगरानी। क्या सचिव अकेले फ़ैसले ले सकता है? — नहीं; बड़े निर्णय प्रबंध समिति/मंज़ूरी से होते हैं।

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तीन बातें याद रखें

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