ऑडिट व वार्षिक रिपोर्ट साल में एक बार बनती हैं — पर समिति तो रोज़ चलती है। रोज़मर्रा के फ़ैसलों के लिए प्रबंध समिति को नियमित, संक्षिप्त रिपोर्ट चाहिए। इन्हें MIS (Management Information System) रिपोर्ट कहते हैं। यह लेख बताता है कि कौन-सी रिपोर्ट कब देखें।
MIS वे छोटी, नियमित रिपोर्ट हैं जो प्रबंध समिति को समय पर सही तस्वीर देती हैं — ताकि समस्या साल के अंत में नहीं, उसी समय पकड़ में आए। मक़सद पूरा हिसाब नहीं, बल्कि निर्णय के काम के कुछ आँकड़े हैं।
| आवृत्ति | रिपोर्ट | किसलिए |
|---|---|---|
| रोज़ | नकद/बैंक शेष | पैसा कहाँ खड़ा है |
| साप्ताहिक | वसूली/बकाया सूची | वसूली पर नज़र |
| मासिक | आय-व्यय सारांश, स्टॉक स्थिति | लाभ/खर्च व माल |
| तिमाही | बजट बनाम वास्तविक | योजना से भटकाव |
💡 अच्छी MIS का नियम: कम पर सही। बीस पन्नों की रिपोर्ट कोई नहीं पढ़ता; एक-पन्ने का सारांश हर बैठक में काम आता है।
हर बैठक में कम-से-कम: नकद/बैंक शेष, महीने का आय-व्यय, बकाया/वसूली की स्थिति, और बड़े लंबित भुगतान। इतने से ही अधिकांश समय पर फ़ैसले हो जाते हैं। (देखें: पदाधिकारियों की भूमिकाएँ।)
अब ये रिपोर्ट कागज़ पर बनाने की ज़रूरत नहीं — सहकारी-विशेष सॉफ्टवेयर का डैशबोर्ड नकद, वसूली, स्टॉक व आय-व्यय एक स्क्रीन पर, लाइव दिखा देता है। यही MIS का सबसे आसान रूप है।
MIS रिपोर्ट क्या है? — प्रबंधन के फ़ैसलों के लिए छोटी, नियमित रिपोर्ट (नकद, वसूली, आय-व्यय आदि)। कितनी बार देखें? — नकद रोज़, वसूली साप्ताहिक, आय-व्यय मासिक, बजट-तुलना तिमाही। MIS और ऑडिट रिपोर्ट में फ़र्क? — MIS नियमित व भीतरी (चलाने के लिए); ऑडिट सालाना व बाहरी। छोटी समिति को MIS चाहिए? — हाँ; एक-पन्ने का साप्ताहिक सारांश भी बहुत काम का है।
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