बजट बना लेना आधा काम है — असली फ़ायदा तब है जब आप बजट की तुलना वास्तविक आँकड़ों से करते रहें। इसी तुलना को variance analysis (भटकाव विश्लेषण) कहते हैं। यह लेख बताता है कि यह क्यों और कैसे करें।
बजट एक योजना है; वास्तविक आँकड़े हक़ीक़त। दोनों का अंतर (variance) बताता है कि योजना कहाँ, कितना भटकी — और यह जल्दी पता चले तो सुधार भी जल्दी हो जाता है। साल के अंत में पता चलने से नुक़सान बढ़ चुका होता है।
📘 भटकाव = वास्तविक − बजट
| मद | बजट | वास्तविक | भटकाव | संकेत |
|---|---|---|---|---|
| बिक्री आय | 10,00,000 | 8,50,000 | −1,50,000 | 🔴 कम |
| वेतन | 3,00,000 | 3,20,000 | +20,000 | 🟡 ज़्यादा |
| ब्याज आय | 1,00,000 | 1,15,000 | +15,000 | 🟢 अच्छा |
💡 हर छोटे अंतर पर मत उलझिए — बड़े व बार-बार दिखने वाले भटकाव पर ध्यान दें। यही "अपवाद से प्रबंधन (management by exception)" है।
कारण पूछें: क्या बजट ही अवास्तविक था, या ख़र्च सच में बढ़ा, या आय घटी? फिर तय करें — खर्च रोकें, वसूली तेज़ करें, या अगली बार बजट सुधारें। (नई साल की योजना के लिए देखें: नया वित्त वर्ष व बजट।)
हर तिमाही बजट बनाम वास्तविक हाथ से जोड़ना थकाऊ है — सहकारी-विशेष सॉफ्टवेयर वास्तविक आँकड़े रिपोर्ट से लेकर भटकाव सीधे दिखा देता है, ताकि प्रबंध समिति समय पर कदम उठाए।
बजट बनाम वास्तविक क्या है? — बजट (योजना) की वास्तविक आँकड़ों से तुलना, ताकि भटकाव पकड़ा जाए। भटकाव कैसे निकालें? — वास्तविक − बजट; आय में अधिक अच्छा, खर्च में कम अच्छा। कितनी बार करें? — आम तौर पर तिमाही; बड़ी समिति मासिक भी। हर भटकाव चिंता का विषय है? — नहीं; बड़े व बार-बार वाले पर ध्यान दें।
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