बड़ी-बड़ी रिपोर्ट पढ़े बिना भी समिति की सेहत जल्दी समझनी हो, तो वित्तीय अनुपात (ratios) सबसे तेज़ रास्ता हैं। ये सादे भाग (division) हैं जो एक आँकड़े को दूसरे से जोड़कर अर्थ देते हैं। यह लेख कुछ सबसे काम के अनुपात आसान भाषा में समझाता है।
अकेला आँकड़ा अधूरा होता है — "₹5 लाख मुनाफ़ा" अच्छा है या बुरा, यह तब पता चलता है जब उसे पूँजी या बिक्री से जोड़ें। अनुपात यही जोड़ बनाते हैं, और साल-दर-साल तुलना आसान कर देते हैं।
💡 अनुपात का असली मूल्य रुझान (trend) में है — एक साल का आँकड़ा नहीं, बल्कि तीन साल की दिशा देखिए। गिरता वसूली-अनुपात या चढ़ता NPA जल्दी कदम उठाने का संकेत है।
अनुपात इशारा करते हैं, फ़ैसला नहीं। असामान्य अनुपात का मतलब जाँच करना है, घबराना नहीं — कारण अक्सर एकमुश्त (one-time) घटना भी होता है।
⚠️ मानक स्तर (benchmark) समिति के प्रकार व राज्य नियमों अनुसार बदलते हैं — किसी खरीद-बिक्री समिति और ऋण समिति के "अच्छे" अनुपात एक जैसे नहीं होते।
साफ़ बही हो तो ये अनुपात हाथ से जोड़ने की ज़रूरत नहीं — सहकारी-विशेष सॉफ्टवेयर रिपोर्ट से सीधे निकाल देता है, और रुझान भी दिखा देता है।
वित्तीय अनुपात क्या हैं? — दो आँकड़ों का भाग जो समिति की सेहत का इशारा देता है (तरलता, वसूली, NPA आदि)। सबसे अहम अनुपात कौन-सा? — ऋण समिति के लिए वसूली % व NPA; खरीद-बिक्री के लिए तरलता व लागत-आय। अच्छा current ratio कितना? — आम तौर पर ~1.5–2, पर प्रकार अनुसार बदलता है। एक साल का अनुपात काफ़ी है? — नहीं; तीन-साल का रुझान देखें।
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