सहकारी समिति "सदस्यों की, सदस्यों के लिए" होती है — इसलिए सदस्य और उनकी शेयर कैपिटल का रिकॉर्ड समिति का सबसे बुनियादी और सबसे संवेदनशील हिसाब है। यहाँ एक छोटी गलती सीधे सदस्य के भरोसे पर असर डालती है। यह लेख बताता है कि सदस्यता, शेयर कैपिटल और डिविडेंड का लेखांकन सही तरीके से कैसे करें।
नए सदस्य के जुड़ने पर अक्सर दो राशियाँ आती हैं, और इन्हें कभी मिलाना नहीं चाहिए:
⚠️ सबसे आम गलती: प्रवेश शुल्क और शेयर कैपिटल को एक ही खाते में डाल देना। इससे न आय सही दिखती है, न सदस्य का शेयर बैलेंस। दोनों के लिए अलग खाता रखें।
मान लीजिए नया सदस्य ₹100 प्रवेश शुल्क + ₹2,000 शेयर कैपिटल नकद देता है। यह एक compound रसीद वाउचर है:
| खाता | Dr | Cr |
|---|---|---|
| नकद (Cash) | ₹2,100 | — |
| प्रवेश शुल्क (आय) | — | ₹100 |
| शेयर कैपिटल | — | ₹2,000 |
Dr = Cr = ₹2,100 — खाता संतुलित। (Dr/Cr की बुनियाद के लिए देखें वाउचर एंट्री गाइड।)
हर सदस्य का अलग रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है, ताकि किसी भी समय बताया जा सके कि उसके पास कितने शेयर हैं और कुल कितनी कैपिटल जमा है। डिजिटल सिस्टम में:
🔍 मिलान-जाँच: शेयर रजिस्टर का कुल = ट्रायल बैलेंस में "शेयर कैपिटल" खाते का शेष। दोनों न मिलें, तो कहीं एंट्री छूटी या गलत खाते में गई है।
साल के अंत पर, बाँटने लायक लाभ में से सदस्यों को उनकी शेयर कैपिटल के अनुपात में डिविडेंड दिया जाता है। ध्यान रखें:
💡 अति-बँटवारा (over-distribution) से बचें: वितरण कभी बाँटने लायक लाभ से ज़्यादा नहीं होना चाहिए, वरना समिति की कैपिटल घटती है और ऑडिट आपत्ति बनती है।
जब सदस्य समिति छोड़ता है, तो उसकी शेयर कैपिटल नियमानुसार लौटाई जाती है:
| खाता | Dr | Cr |
|---|---|---|
| शेयर कैपिटल | ₹2,000 | — |
| नकद/बैंक | — | ₹2,000 |
इससे सदस्य का शेयर बैलेंस शून्य हो जाता है और कुल शेयर कैपिटल उतनी घट जाती है।
सदस्य व शेयर लेखांकन सही हो, तो हर सदस्य अपना हक़ साफ़ देख सकता है — और यही सहकारिता की आत्मा है। डिजिटल सिस्टम में यह सब अपने-आप मिलता है, बशर्ते आप शुरुआत में सही खाते चुनें।
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