जब समिति किसी को बड़ी रकम का भुगतान करती है — ठेकेदार, किराया, कमीशन, ब्याज — तो कई बार उसमें से TDS (स्रोत पर कर कटौती) काटना ज़रूरी होता है, और हर तिमाही 26Q रिटर्न भरना होता है। यह लेख इसे आसान बनाता है।
भुगतान करते समय समिति एक तय प्रतिशत काटकर बाकी राशि देती है, और कटी हुई रकम सरकार के पास पाने वाले के नाम जमा करती है। यानी समिति बस "बीच का संग्राहक" है।
⚠️ TDS की दरें, सीमाएँ व किन भुगतानों पर लागू है — ये समय-समय पर बदलते हैं। अपनी समिति पर लागू मौजूदा दरें आयकर पोर्टल या CA से पक्का करें। यह लेख तरीका समझाता है।
मान लें TDS दर 2% है:
| खाता | Dr | Cr |
|---|---|---|
| ठेकेदार खर्च | ₹50,000 | — |
| TDS देय (देनदारी) | — | ₹1,000 |
| बैंक (असल भुगतान) | — | ₹49,000 |
यानी ठेकेदार को ₹49,000 मिले, ₹1,000 TDS रुका। फिर वह ₹1,000 सरकार को जमा करना है।
🔍 TDS एक ही बार काटें (भुगतान या क्रेडिट, जो पहले हो) — दोहरी कटौती आम गलती है। (देखें ऋण व ब्याज लेखांकन।)
TDS कठिन नहीं — सही दर पर काटें, समय पर जमा करें, तिमाही 26Q भरें। डिजिटल सिस्टम में TDS रजिस्टर व 26Q अपने-आप तैयार रहता है।
✅ TDS, चालान व 26Q — एक जगह। SahakarLekha पर मुफ्त शुरू करें।
अपनी समिति का खाता मुफ्त में डिजिटल कीजिए — रजिस्टर करें →