जिन समितियों में कर्मचारी हैं, उनके लिए वेतन का सही हिसाब ज़रूरी है — सिर्फ़ "कितना दिया" नहीं, बल्कि EPF, ESI, TDS जैसी कटौतियाँ भी सही दर्ज होनी चाहिए। यह लेख पेरोल को आसान बनाता है।
📘 शुद्ध वेतन = सकल वेतन − कुल कटौतियाँ
मान लें EPF ₹1,800 + ESI ₹150 कटा:
| खाता | Dr | Cr |
|---|---|---|
| वेतन खर्च | ₹20,000 | — |
| EPF देय (देनदारी) | — | ₹1,800 |
| ESI देय (देनदारी) | — | ₹150 |
| बैंक/नकद (शुद्ध भुगतान) | — | ₹18,050 |
यानी कर्मचारी को ₹18,050 मिले; EPF/ESI की रकम समिति के पास "जमा करने योग्य" रुकी।
EPF, ESI, PT व TDS — हर एक की अलग देनदारी होती है, जिसे समय पर संबंधित विभाग में जमा करना होता है। जमा करने पर वह देनदारी घटती है और बैंक से भुगतान होता है।
⚠️ EPF/ESI/TDS की दरें व सीमाएँ नियमानुसार बदलती हैं — अपनी समिति पर लागू मौजूदा दरें संबंधित पोर्टल/CA से पक्का करें।
🔍 कर्मचारी को दिया शुद्ध वेतन खर्च नहीं घटाता से अलग — पूरा सकल वेतन खर्च है; कटौतियाँ सिर्फ़ "किसे कब चुकाना है" तय करती हैं।
पेरोल का राज़ — सकल को खर्च मानना, हर कटौती की अलग देनदारी, और समय पर जमा। डिजिटल सिस्टम में स्लिप, कटौती व जमा-एंट्री अपने-आप बनती हैं।
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