वेतन व पेरोल लेखांकन: EPF, ESI व TDS सहित

जिन समितियों में कर्मचारी हैं, उनके लिए वेतन का सही हिसाब ज़रूरी है — सिर्फ़ "कितना दिया" नहीं, बल्कि EPF, ESI, TDS जैसी कटौतियाँ भी सही दर्ज होनी चाहिए। यह लेख पेरोल को आसान बनाता है।

वेतन के तीन हिस्से

  1. सकल वेतन (Gross) — कुल तय वेतन।
  2. कटौतियाँ — EPF, ESI, प्रोफेशनल टैक्स, TDS।
  3. शुद्ध वेतन (Net) — जो कर्मचारी को असल में मिलता है।

📘 शुद्ध वेतन = सकल वेतन − कुल कटौतियाँ

एक उदाहरण — ₹20,000 सकल वेतन

मान लें EPF ₹1,800 + ESI ₹150 कटा:

खाता Dr Cr
वेतन खर्च ₹20,000
EPF देय (देनदारी) ₹1,800
ESI देय (देनदारी) ₹150
बैंक/नकद (शुद्ध भुगतान) ₹18,050

यानी कर्मचारी को ₹18,050 मिले; EPF/ESI की रकम समिति के पास "जमा करने योग्य" रुकी।

कटौतियाँ सरकार को जमा करना

EPF, ESI, PT व TDS — हर एक की अलग देनदारी होती है, जिसे समय पर संबंधित विभाग में जमा करना होता है। जमा करने पर वह देनदारी घटती है और बैंक से भुगतान होता है।

⚠️ EPF/ESI/TDS की दरें व सीमाएँ नियमानुसार बदलती हैं — अपनी समिति पर लागू मौजूदा दरें संबंधित पोर्टल/CA से पक्का करें।

🔍 कर्मचारी को दिया शुद्ध वेतन खर्च नहीं घटाता से अलग — पूरा सकल वेतन खर्च है; कटौतियाँ सिर्फ़ "किसे कब चुकाना है" तय करती हैं।

तीन बातें याद रखें

आख़िर में

पेरोल का राज़ — सकल को खर्च मानना, हर कटौती की अलग देनदारी, और समय पर जमा। डिजिटल सिस्टम में स्लिप, कटौती व जमा-एंट्री अपने-आप बनती हैं।

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