हर सहकारी समिति के लिए वार्षिक ऑडिट अनिवार्य है — पर यह होता कैसे है? कौन करता है, किस क्रम में, और अंत में क्या मिलता है? यह लेख पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में समझाता है। (तैयारी की चेकलिस्ट अलग है — देखें ऑडिट की तैयारी।)
सहकारी समिति सदस्यों के पैसे से चलती है, इसलिए हर साल एक स्वतंत्र जाँच होती है कि हिसाब सही है, नियम माने गए, और पैसा सही जगह लगा। यह पारदर्शिता व भरोसे की रीढ़ है, और राज्य सहकारी अधिनियम के तहत ज़रूरी है।
ऑडिटर आम तौर पर सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) द्वारा नियुक्त/अनुमोदित होता है — विभागीय ऑडिटर, या पैनल में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट (राज्य नियमों अनुसार)। समिति अपनी मर्ज़ी से किसी भी ऑडिटर को नहीं रख सकती।
💡 ऑडिट "पकड़ने" के लिए नहीं, सुधारने के लिए है — साफ़ रिकॉर्ड रखने वाली समिति का ऑडिट सहज और तेज़ रहता है।
सहकारी समिति का ऑडिट कैसे होता है? — RCS-नियुक्त ऑडिटर बही जाँचता है, आपत्तियाँ दर्ज करता है, रिपोर्ट व वर्गीकरण देता है; समिति आपत्तियों का निराकरण करती है। ऑडिटर कौन नियुक्त करता है? — RCS/पैनल (राज्य नियमों अनुसार), न कि समिति स्वयं। ऑडिट कब होता है? — आम तौर पर हर वित्त वर्ष के बाद, सालाना। आपत्ति आए तो? — समय पर सुधार व निराकरण रिपोर्ट RCS को दें।
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