नए लेखाकार अक्सर कैश और बैंक को आपस में मिला देते हैं — और यहीं से गड़बड़ी शुरू होती है। दोनों अलग बहियाँ हैं, अलग उद्देश्य के लिए। यह लेख दोनों का फर्क और सही इस्तेमाल आसान भाषा में बताता है।
कैश बुक में समिति की सारी नकद रसीद और भुगतान तारीख के क्रम में दर्ज होते हैं, और किसी भी समय कैश-इन-हैंड का शेष दिखता है।
💡 कैश बुक का शेष उस नकद के बराबर होना चाहिए जो आप भौतिक रूप से गिन सकते हैं। अंतर हो तो तुरंत जाँचें।
बैंक बुक में हर बैंक खाते की जमा और निकासी दर्ज होती है, और समिति के रिकॉर्ड के अनुसार बैंक शेष दिखता है। एक समिति के कई बैंक खाते हो सकते हैं — हर एक की अपनी बैंक बुक।
| बिंदु | कैश बुक | बैंक बुक |
|---|---|---|
| किसके लिए | भौतिक नकद | बैंक का पैसा |
| शेष | कैश-इन-हैंड | बैंक शेष (बही अनुसार) |
| जाँच | भौतिक गिनती से | बैंक स्टेटमेंट से मिलान (BRS) |
| ऋणात्मक? | कभी नहीं (गलती का संकेत) | सामान्यतः नहीं |
⚠️ कैश और बैंक को एक खाते में मिलाना सबसे आम चूक है — इससे न कैश मिलती है, न बैंक। दोनों अलग रखें।
जब नकद बैंक में जमा करते हैं या बैंक से निकालते हैं, तो यह contra लेन-देन है — एक तरफ़ कैश, दूसरी तरफ़ बैंक। दोनों बहियाँ अपने-आप अद्यतन रहती हैं।
कैश बुक और बैंक बुक में फर्क? — कैश बुक भौतिक नकद की, बैंक बुक बैंक के पैसे की। क्या एक ही बही में दोनों रख सकते हैं? — नहीं रखना चाहिए; अलग रखने से मिलान साफ़ रहता है। बैंक बुक और पासबुक एक हैं? — नहीं; बैंक बुक समिति का रिकॉर्ड, पासबुक/स्टेटमेंट बैंक का। दोनों को मिलाया जाता है।
जुड़े शब्द: कैश बुक · बैंक बुक · कैश · बैंक खाता · कैश-इन-हैंड
कैश और बैंक को साफ़ अलग रखना सही हिसाब की पहली शर्त है। SahakarLekha में दोनों अलग, और कई बैंक खाते भी आसानी से।
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📘 स्रोत: सक्रिय Knowledge Items (KI-000101/114/099/113/100) — Evidence Level A (शैक्षिक)।
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