इस अध्याय के बाद आप कर पाएँगे: हिसाब-किताब का महत्व बताना; डेबिट-क्रेडिट लगाना; खातों के पाँच प्रकार पहचानना; अकाउंटिंग इक्वेशन व चक्र समझना।
बिना लिखित, क्रमबद्ध रिकॉर्ड के समिति की सच्ची आर्थिक स्थिति पता नहीं चलती।
| बिना हिसाब के खतरा | सही हिसाब से लाभ |
|---|---|
| पैसा कहाँ गया, पता नहीं | हर पैसे का हिसाब |
| ऑडिट में आपत्तियाँ, जुर्माना | ऑडिट साफ़, समय पर रिटर्न |
| सदस्यों का भरोसा डगमगाना | पारदर्शिता, भरोसा |
| डिविडेंड/अनुदान का गलत हिसाब | सही लाभ-वितरण |
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| लेन-देन (Transaction) | पैसे/माल का आदान-प्रदान |
| खाता (Account) | एक प्रकार की चीज़ का अलग रिकॉर्ड |
| वाउचर (Voucher) | लेन-देन की एंट्री/प्रमाण |
| डेबिट (Dr) / क्रेडिट (Cr) | खाते का बायाँ / दायाँ पक्ष |
| बही (Ledger) | हर खाते का अलग पन्ना |
| ट्रायल बैलेंस (Trial Balance) | सभी शेषों की सूची (Dr कुल = Cr कुल) |
मूल नियम: हर लेन-देन के दो पहलू होते हैं — एक खाते में नाम (Dr), दूसरे में जमा (Cr), और दोनों की राशि बराबर।
उदाहरण: सदस्य से ₹5,000 शेयर कैपिटल नकद ली।
| खाता | Dr (₹) | Cr (₹) |
|---|---|---|
| नकद खाता | 5,000 | |
| शेयर कैपिटल खाता | 5,000 |
⚠️ असंतुलित एंट्री गलत है। सहकार लेखा ऐसी एंट्री सहेजने नहीं देता (Dr=Cr अनिवार्य)।
| प्रकृति | बढ़ने पर | घटने पर |
|---|---|---|
| संपत्ति (Asset) | Dr | Cr |
| व्यय (Expense) | Dr | Cr |
| देनदारी (Liability) | Cr | Dr |
| कैपिटल (Capital) | Cr | Dr |
| आय (Income) | Cr | Dr |
| प्रकार | समिति में उदाहरण |
|---|---|
| संपत्ति (Asset) | नकद, बैंक, स्टॉक, गोदाम, वसूली |
| देनदारी (Liability) | आपूर्तिकर्ता को देय, बैंक ऋण, जमाराशि |
| कैपिटल/फंड (Capital) | शेयर कैपिटल, रिज़र्व फंड, लाभ |
| आय (Income) | बिक्री, ब्याज आय, प्रवेश शुल्क |
| व्यय (Expense) | खरीद, वेतन, किराया, डेप्रिसिएशन |
संपत्ति = देनदारियाँ + कैपिटल। सहकारी रूप: संपत्ति = बाह्य देनदारियाँ + सदस्य-फंड (शेयर कैपिटल + रिज़र्व + लाभ)। हर सही एंट्री के बाद यह संतुलित रहता है — यही बैलेंस शीट के मिलान का आधार है।
लेन-देन → वाउचर → बही (Dr=Cr) → ट्रायल बैलेंस → अंतिम खाते (व्यापार → आमदनी-खर्च → बैलेंस शीट) → ऑडिट व रिटर्न। सहकार लेखा में आप सिर्फ़ एंट्री करते हैं; बाक़ी अपने-आप बनता है — पर समझ आपको होनी चाहिए।
| गलती | बचाव |
|---|---|
| Dr/Cr उलट देना | नियम-तालिका देखें |
| एक ही पहलू दर्ज करना | दोहरा-लेखा याद रखें |
| व्यय को संपत्ति मानना | "खर्च = Dr, कमाई = Cr" |
"समिति की एंट्रियों में डेबिट योग व क्रेडिट योग समान पाए गए; दोहरा-लेखा सिद्धांत का पालन संतोषजनक है।"
सहकारी समितियाँ दोहरा-लेखा व उपार्जन आधार पर खाते रखती हैं।
एक दिन के 4 लेन-देन: (1) शेयर कैपिटल ₹5,000 नकद; (2) खाद ₹10,000 उधार; (3) सदस्य को ₹2,000 नकद बिक्री; (4) वेतन ₹8,000 नकद।
| खाता | Dr (₹) | Cr (₹) |
|---|---|---|
| नकद | 5,000 | |
| शेयर कैपिटल | 5,000 | |
| खाद खरीद | 10,000 | |
| इफको (देय) | 10,000 | |
| नकद | 2,000 | |
| बिक्री | 2,000 | |
| वेतन | 8,000 | |
| नकद | 8,000 |
एक क्लर्क ने सिर्फ़ नकद रजिस्टर रखा, लेजर नहीं। साल-अंत में "स्टॉक कितना, उधार किसको?" का जवाब नहीं था। सीख: हर खाते की अलग बही चाहिए।
प्र. ऐप अपने-आप करता है तो Dr/Cr क्यों समझूँ? ताकि गलती पकड़ सकें व रिपोर्ट समझ सकें। प्र. शेयर कैपिटल आय है या कैपिटल? कैपिटल — यह कमाई नहीं, सदस्य का योगदान है।
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